Cloud Seeding :क्या इंसान ने बारिश पर काबू पा लिया है ? कुछ साइंटिस्ट कहते हैं वो जहा चाहें पानी बरसा सकते हैं

Ab insano ke isharo pe hogi barish or khilegi dhoop , kaise aaiye jaante hai .

इंसान लगातार प्रकर्ति को टक्कर देने में लगा हुआ है पहले तो उसने अपनी सुविधा के लिए पेड़ काट दिए और फिर हमने प्राकृतिक हवा को इतना दूषित किया की अब तो सांस लेना भी मुश्किल हो गया है और अब उन्होंने फिर से उसे टक्कर देने जा रहे है । अब रूस के लोगो ने एक ऐसी चीज़ का अविष्कार किया है जिससे आप पल भर में धूप और पल भर में बारिश करवा सकते है ।

तो आइये पढ़ते है की वो कौन सी चीज़ है जिससे मौसम इंसानो के इसारे पे चलेगा ।

रूस के लोगो ने जिस चीज़ का अविष्कार किया है उसे क्लाउड सीडिंग कहते है । रूस का कहना है की क्लाउड सीडिंग के ज़रिये वो कही भी कभी भी मौसम का मिजाज़ बदल सकते है और इसका प्रयाग उन्होंने अपने सालाना होने वाले सेना दिवस के समारोह से पहले किया था । रूसी सेना ने कहा की जब वो सेना दिवस के समारोह की रिहर्सल कर रहे थे तब वह बारिश हो रही थी और लग रहा था की ये मौसम जल्दी साफ़ नहीं होगा पर अचानक से आसमान खुल गया और हर तरफ सूरज की तेज़ रोशनी पड़ने लगी थी । कहाँ जाता है की रूस ने मौसम को साफ़ करने के लिए क्लाउड सीडिंग का ही इस्तेमाल किया और साथ ही उसका परीक्षण किया था ।

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जब रुसी सेना से क्लाउड सीडिंग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा की "इस तकनीक के ज़रिये वो किसी महत्वपूर्ण समारोह के आयोजन से पहले ही वह बारिश करवा देते है ताकि समारोह वाले दिन वह मौसम खुला रहे पर मौसम विशेषज्ञों का इस विषय में कुछ और ही कहना है, वो कहते है की इंसानो की छमता अभी उतनी नहीं है की वो मौसम को प्रभवित कर सके । क्लाउड सीडिंग के विषय में उन्होंने ने बताया की ये उतना प्रभावी नहीं है जितना वो समझ रहे है और किसी मौसम को बदलने के लिए "क्लाउड सीडिंग" का काफी ज़्यादा बार इस्तेमाल करने के बाद ही वो कही काम करता है ।

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ऐसा उन्होंने इसीलिए कहा क्यूंकि अभी जितने बार क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया गया है वो काफी सीमित जगह पर ही करा गया है जो की काफी सफल ही रहा पर जब इसका प्रयोग सूखे पड़े इलाको में करा गया, जहाँ बारिश की बहुत ज़रूरी है तो वहा ये पूरी तरह से असफल रहा । खेतों को ओलों से बचाने के लिए भी ओले-भरे बादलों को पहले ही फटवाने की कोशिश भी ज्यादा असर नहीं दिखा पायी है।

अब आपको बताते है की इस तकनीक के पीछे क्या राज़ है...

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इस तकनीक ने पीछे है "Silver Iodide" इससे नाभिक तूफानी बादलों में रोपे जाते हैं। फिर इन नाभिकों पर वाष्प संघनित होती है और छोटे छोटे बर्फ के क्रिस्टल बन जाते हैं। जिसके ज़रिये वो मौसम में फेर बदल कर सकते है । इसका इस्तेमाल सिर्फ रुसी सेना ही नहीं बल्कि जर्मनी के वाइन बनाने वाले भी इसका काफी इस्तेमाल करते है । वो लोग अपनी खेती को ओलो से बचाने के लिए  "Silver Iodide" का इस्तेमाल करते है ।

वो लोग एक हवाई जहाज के ज़रिये इस रसायन का छिड़काव बदलो में करते है । विमान को तूफानी बादलों के ऊपर या नीचे उड़ाया जाता है और तब उसका छिड़काव किया जाता है । इस रसायन की बुँदे इतनी छोटी होती है की वो ज़मीन पर पहुँचती ही नहीं बल्कि बादलों के पास तैरती रहती हैं। ऊपरी वातावरण में तापमान कम होने के कारण बूंदों के आसपास जल्द ही रवाकरण हो जाता है और फिर जमीन पर गिरते हुए यह पिघल कर वर्षा करा देते हैं।

वैसे तो Silver Iodide को ईयू के खतरनाक पदार्थों की सूची में रखा गया है इसके ज़्यादा मात्रा इस्तेमाल करने से ज़मीन पर बाकी अणु को दूषित कर देता है इसीलिए Silver Iodide का इस्तेमाल काफी कम मात्रा में किया जाता है जिससे किसी भी चीज़ की हानि न हो ।  

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