क्या कोई बिना बैनर ,पोस्टर और गाड़ी के काफिलों के चुनाव जीत सकता है वो भी उत्तर प्रदेश में ?

जिस उत्तर प्रदेश में 2017 चुनाव में लड़ने वाले 1165 उम्मीदवार करोड़पति हैं वहाँ आपसे कोई ये कहे की मैंने अपने चुनाव के लिए कोई बैनर पोस्टर नहीं बनवाये और मैं कार्यकर्ता भी नहीं रखता तो आप उसे क्या कहेगे ?

क्या कोई बिना बैनर ,पोस्टर और गाड़ी के काफिलों के चुनाव जीत सकता है वो भी उत्तर प्रदेश में ?

जिस उत्तर प्रदेश में 2017 चुनाव में लड़ने वाले 1165 उम्मीदवार करोड़पति हैं वहाँ आपसे कोई ये कहे की मैंने अपने चुनाव के लिए कोई बैनर पोस्टर नहीं बनवाये और मैं कार्यकर्ता भी नहीं रखता तो आप उसे क्या कहेगे ?

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश में 618 विधयक ऐसे हैं जैसे जिन्होंने भारतीय चुनाव आयोग को खुद ही ये बतया है के उनके ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं ! वही 500 विधयक ऐसे हैं जिनके ऊपर गंभीर आपराधिक मामले है ! 1165 उम्मीदवार ऐसे हैं जिसके पास करोड़ो की दौलत है ! ऐसे में क्या आप कल्पनया कर सकते हैं एक ऐसे उम्मीदवार की जिसके पास अपनी गाड़ी नहीं है  जो पोस्टर बैनर नहीं छपवाता और वो तीन बार विधायक रह चूका है ! जी है कल्पना करना मुश्किल है पर निजामाबाद सीट से तीन बार विधायक रहे 'आलम बादी' कुछ ऐसे ही हैं ! 

उत्तर प्रदेश देश का वो राज्य जिसकी राजनीति का नाम आते है मन में  बाहुबल ,अपराध , हत्या ,पैसा जिसे विचार आने लगते हैं ! ऐसे में आलम बादी जैसे विधयक को अपवाद कहना गलत नहीं होगा। जहा उम्मीदवार चुनाव में पैसों को पानी की तरह बहाता हैं, चाहे व ब्लैक के हो या वाइट का. आज बिना पैसों के चुनाव लड़ने के बारें में भी सोचा नही जा सकता. वही आलम बादी का चुनाव लड़ने का अलग रास्ता है वो औरो से अलग चुनावी सामग्री जैसे बैनर , पोस्टर , चिलाती हुयी गाड़िया ये सब नहीं रखते ! बल्कि इनकी जगह वो पैदल ही चुनाव प्रचार के लिए निकल जाते हैं ! कभी वो प्रचार के लिए साइकल का सहारा लेते हैं ! अखिलेश सरकार में विधायक रहे आलम बदी को जब सरकार ने मंत्री पद देना चाहा तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया . एक प्राइवेट चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में वो कहते हैं मैं जिस कमरे में रहता हूं, वहीं रहूंगा. लाल बत्ती नहीं लूंगा.जब पद का ऑफर मिला तो मैंने कहा कि मैं जैसे रहता हूं, उससे दूसरे मंत्रियों को दिक्कत हो जाएगी. उनकी सोच दुसरो से अलग है उनका मानना है कि राजनीति में आना जनता की सेवा है, मौज नहीं. जिस समाजवादी पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं से हर वक्त घिरे रहते है वही आलम बादी कहते हैं उन्हें कार्यकर्ता नहीं चाहिए . उनका कहना है उन्हें जनता से रूबरू करने के लिए कार्यकर्ता की ज़रूरत नहीं है उन्हें जनता खुद जानती है ! इतना ही नहीं वो कार्यकर्ता रखने से इंकार तो करते ही हैं साथ ही उनका कोई फेसबुक या ट्विटर अकाउंट नहीं है ! जहा नेता चुनाव जितने के बाद बहुत ईद का चाँद हो जाते हैं वही ये साहब आजमगढ़ शहर की गलियों में वो दिखाई दे जाता है, इनका परिवार काफी बड़ा है और सब साथ रहते हैं। इलाके में उनकी साख तो काफी है पर ठाट-बाट शान-ओ-शोकत जैसी दिखवे की चेज़े नदारद है ! आलम बादी की उम्र इस समय 82 वर्ष है ! जहा आज कल नेता के काफिले में गाड़ी का झुण्ड गिनते नहीं गिनता वही यह जनाब उत्तर प्रदेश की रोडवेज बसों से यात्रा करते हैं, नेताओ के लाखो के कपडे से अलग ये सस्ते कपड़े पहनते है। सुन कर अचरज होगा पर इसके पास खुद की कोई कार नहीं है। 

जब सत्तारूढ़ अखिलेश यादव सरकार ने साल 2012 में द्वारा मंत्री पद की पेशकश की थी ! उस वक़्त उनके बैंक खाते में 9 हजार रुपये थे पर उन्होंने ये पद ये कह कर ठुकरा दिए की उनका मकसद लोगो के लिए काम करना है ! इनका जीवन परिचय फिल्मो के किसी नायक की तरह लगता है पर ये सच्चाई है !

जहा आज नेताओ का चुनाव खर्च करोड़ में पहुच रहा है वही आलम बादी का कहना है कि अपने चुनाव अभियान में उन्होंने केवल 2 लाख रुपए खर्च किये है। बादी ने पिछला चुनाव भी एक बहुत ही कम बजट में लड़ा था। उनका लक्ष्य समाज सेवा है इसलिए वो समाजसेवा के लिए तत्पर रहते हैं वो अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के लिए 8 घंटे रोजाना काम करते हैं ! उनका कहना है जब वो साल के प्रत्येक दिन सुबह 9 से शाम 5 बजे तक लोगो के बिच रहते हैं तो उन्हें अलग से चनाव प्रचार की क्या ज़रूरत ! अनोखी बात ये है एक बार जब वो चुनाव हर गए तब भी लोगो के बिच जाना न भूले ! तब से अब तक 3 बार चुनाव जीत चुके हैं ! एक बार फिर साल २०१७ में वो चुनाव मैदान में उतरे हैं अपनी पांचवी पारी खेलने के लिए है !

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