कौन थे "चे" ?

एक ऐसा सैनिक जिसने अपने साथियो को कभी ये नहीं कहा जाओ जा कर लड़ो! बल्कि हमेशा यही कहता था लड़ाई में मेरा पीछा करो !

कौन थे "चे" ?

एक ऐसा सैनिक जिसने अपने साथियो को कभी ये नहीं कहा जाओ जा कर लड़ो! बल्कि हमेशा यही कहता था लड़ाई में मेरा पीछा करो !

इस दुनिया में कई प्रकार के लोग रहते आये हैं कुछ जो अत्यचार सह कर बहु चुप रहते हैं क्यों की उन्हें लगता है वो अकेले क्या बदल सकते हैं पर कुछ लोग ऐसे भी है जो ये सब नहीं सोचते उनका लक्ष होता है लक्ष हासिल करना चाहे वो अकेले हो या फिर उनका साथ लोगो की बड़ी भीड़ हो ! ऐसे ही लोग दुनिया में क्रांति लाते हैं ! चलते फिरते आपने लोगो के टीशर्ट पे एक फोटो देखि होगी जिसमे एक आदमी बिखरे बालो के साथ सर पर टोपी लगाए हुए है जसमे एक स्टार बना हुआ है ! क्या आप जानते हैं ये फोटो किसकी है ! चलिए आपको बताते हैं ये फोटो है महान क्रन्तिकारी "चे" गेवारा की जिन्हें दुनिए इतिहास का सबसे बाद क्रन्तिकारी मानती है !

कौन थे "चे" गेवारा ?

"चे" गेवारा , एक अर्जेन्टीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी होने के साथ साथ पेशे से एक डॉक्टर, गुरिल्ला नेता, लेखक गुरिल्ला नेता, सामरिक सिद्धांतकार और कूटनीतिज्ञ भी थे. उनका लक्ष दुनिए में क्रांति लाकर उन्हें स्वतंत्र बनाने का प्रयास करना था ! उन्होंने न सिर्फ क्यूबा की क्रांति में मुख्य भूमिका निभाई बल्के दक्षिणी अमरीका के कई राष्ट्रों में क्रांति लाकर उन्हें स्वतंत्र बनाने का प्रयास भी किया ! 

शुरुआती जीवन 

चे गेवारा का जन्म १४ जून ,१९२८ को अर्जन्टीना के रोसारियो नामक स्थान पर हुआ था ! उनके पिता का नाम अर्नेस्टो ग्वेरा लिंच और माँ का नाम था सिलिया दे ला सेरणा ये लोसा . उनकी पांच संतानो में चे सबसे बड़े थे ! उनके माँ बाप दोनों का सम्बन्ध प्रतिष्टित परिवार से था !  पिता आयरिश मूल के थे जबकि माँ का सम्बन्ध स्पेन के नामी परिवार से था ! उनका परिवार कभी अर्जेंटीना के सबसे रसूकदार परिवारों में गिना जाता था ! पर चे के जन्म के समय उनकी आर्थिक हालात बहुत अच्छी नहीं थी !  चे गेवारा के पिता स्पेन के जान क्रांति के सप्पोर्टर थे ! इस क्रन्तिकारी विचार धारवाले घर में पैदा होने की वजह से चे के मन में गरीबो के लिए हमदर्दी की भावना बहुत पहले से ही पैदा हो गई थी ! सिर्फ पिता ही नहीं माँ भी स्त्री आज़ादी और समाजवादी विचारधारा की प्रबल समर्थक थी ! मौत से संघर्ष का खेल बचपन से शुरू हो गया था ! जब वो सिर्फ ४० दिन के थे उन्हें निमोनिया हो गया और वो मरते मरते बचे ! जब वो २ साल के थे उन्हें दमा का पहला दौर पड़ा ये साल ये 2 मई 1930 की बात है ! ये तो बस शुरआत थी अगले 3 सालो तक उनका और दमा का जैसे एक रिश्ता सा बन गया ! उनका दमा से संघर्ष लगातार तीन सालो तक चला हर रोज़ दौर , हर रोज़ मौत का डर का सिलसिला चलता रहा ! माता पिता उनकी हालात देख कर परेशान रहते ! डॉक्टर की सलाह पर हर जगह भागदौड़ करते रहते ! उनका इस बीमारी के चलते उन्होंने कई जगहों की यत्र्ये भी की ! ये अर्नेस्टो की हालत में कुछ सुधर की उम्मीद में वे एक जगह से दूसरी जगह बदलते रहते ! आखिकार उन्हें कोरडोबा नगर के पास एक क़स्बा मिला अल्टा ग्रेशिया ! यहाँ की अब हवा बहुत अच्छी थी इस खुशमिजाज़ अब हवा में साँस ले के बच्चे अर्नेस्टो कुछ रहत महसूस हुई ! दमा पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ पर यह आने पर उन्हें बहुत रहत मिली ! पर अब तक शिशु अर्नेस्टो इतना कमज़ोर पद चूका था की उसका स्कूल जाना सम्भव नहीं था ! ऐसे में माँ ही शिशु अर्नेस्टो की पाठशाला बानी ! माँ ही घर पर उसे पड़ती थी और शिशु अर्नेस्टो की दूसरी साथी बानी उनके घर पर राखी समाजवादी विचार धारा की किताबे ! पिता व्यपार के सिलसिले में ज़्यादा बहार ही रहते थे ! ऐसे में अर्नेस्टो का खली समय किताबो में ही बीतने लगा ! अल्टा ग्रेशिया की आबो-हवा ने अर्नेस्टो को इतना सुकून दिए की उसके माता पिता इस जगह को छोड़ कर कहा और जा ही नहीं पाए ! पिता ने व्यपार यहाँ जमाना शुरू कर दिए !  अल्टा ग्रेशिया अपने भाई बहनो के साथ खेलते अर्नेस्टो का यहाँ बिता शांतिमय जीवन उनकी ज़िन्दगी में दुबारा कभी लौट के नहीं आया ! 

राजनीति में कदम !

नेतृत्व का गुण चे में बचपन से ही आ गया था ! लड़कपन बीतते बीतते वो अपने आपको एक मज़बूत ,जोशीले , दूरंदेशी , हौसला रखने वाले इंसान के रूप में अपने आपको ढल चुके थे ! एक ऐसा युवा जो उन कार्यो की चिता करता है जो उसकी उम्र के दूसरे युवा नहीं करते !  ये वही दिन था जब अर्नेस्तो का रुझान राजनीती की तरफ बड़ा ! साल 1936 स्पेन में सेना ने अचानक विद्रीह कर दिया ! जनरल फ्रांसिस्को फ्रेंको की आगुई में सेना का एक समूह निर्वाचित सर्कार को उखाड़ फेकने पर तुला था ! इस विद्रोही सेना के समूह को जर्मन सम्राट अडोल्फ हिटलर और इटली के मुसोलिनी का समर्थन मिला हुआ था ! अपने सैनिक ताकत के बदौलत जनरल फ्रांसिस्को फ्रेंको ने सरकार को उखाड़ फेका ! उस समय अर्नेस्टो ग्वेरा उन युवको में से थे जो मन रहे थे की चुनी हुई सरकार इस युद्ध में विजव रहेगी ! उन्होंने अपनी दीवार पर स्पेन का एक नक्शा टेंगा था उसमे वो सरकार और विधरोहियो की स्थिति और उनकी रणनीति के बारे में चर्चा करते रहते थे ! युद्ध में रिपब्लिकन सरकार कमज़ोर पड़ने लगी क्यों की विधरोहियो को बहरी देशो से मदद मिल रही थी ! ऐसे में युद्ध का असर उनका कसबे पर भी पड़ने लगा कसबे में शरणार्थियों का आना बढ़ने लगा ! अर्नेस्टो ग्वेरा के पिता ने नाज़ी समर्थित विधरोहियो के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एक संस्था का निर्माण किया ! जिसका काम था नाज़ी प्रभाव के विरिध करने वालो से चंद ले कर नाज़ी समर्थित विधरोहियो के खिलाफ युद्ध चलना ! इस समय अर्नेस्टो ११ साल का था और वो अपने पिता काम भी हिस्सा लेता था ! साल 1942  में  अर्नेस्टो को हाई स्कूल में प्रवेश मिल गया ! पर हाई स्कूल जाने के लिए उसे अपने कसबे से 32 की.मि दूर कोरडोवा जाना पड़ता था ! अर्नेस्टो की माँ को ये बात मंज़ूर नहीं थी की उसका दमा से ग्रस्त बेटा इतनी दूर अकेले जाये इसलिए पूरा परिवार कोरडोवा आ गया ! 

आगे चल कर अर्नेस्टो डॉक्टरी की पढ़ाई में दाखिल ले लिया! चिकित्सीय शिक्षा के दौरान चे पूरे लातिनी अमरीका में काफी घूमे। इस दौरान पूरे महाद्वीप में गरीबी और माह मरी की हालात देखा कर उन्हें बहुत दुःख पंहुचा । उन्होंने इस गरीबी के कारणों पे विचार किया और पाया की इनका मुख्य कारन है ! एकाधिप्तय पूंजीवाद, नवउपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद ! इसके आज़ाद होने का उनके हिसाब से सिर्फ एक ही रास्ता था और वो का क्रांति ! क्रांति को ही हल मानते हुए  इन्होंने गुआटेमाला के राष्ट्रपति याकोबो आरबेंज़ गुज़मान के द्वारा किए जा रहे समाज सुधारों में भाग लिया। उनकी इस क्रांतिकारी सोच को और ताकत मिली जब गुज़मान को अमरीका की मदद से हटा दिया गया। इसके कुछ ही समय बाद मेक्सिको सिटी में इन्हें राऊल और फिदेल कास्त्रो मिले और ये क्यूबा की २६ जुलाई क्रांति में शामिल हो गए।

क्यूबा की क्रांति के बाद का समय !

क्यूबा की क्रांति के बाद अर्नेस्टो चे ग्वेरा ने नयी सरकार में कई महत्वपूर्ण कार्य किये और साथ ही सारे विश्व में घूमकर क्यूबा समाजवाद के लिये अंतर्राष्ट्रीय समर्थन भी जुटाया. इनके द्वारा प्रशिक्षित सैनिको ने पिंग्स की खाड़ी आक्रमण को सफलतापूर्वक पछाड़ा. 

अर्नेस्टो चे ग्वेरा के द्वारा लिखी गई चर्चित पुस्तके ! 

अर्नेस्टो चे ग्वेरा ने बहुत कुछ लिखा भी है, इनकी सबसे प्रसिद्ध किताबो में है – गुरिल्ला युद्ध की नियम-पुस्तक और दक्षिणी अमेरिका में इनकी यात्राओ पर आधारित मोटर साइकिल डायरिया. 1965 में अर्नेस्टो चे ग्वेरा क्यूबा से निकलकर कांगो पहोचे जहा उन्होंने क्रांति लाने का विफल प्रयास किया. 

निधन 

कांगो में क्रांति की कोशिशो के बाद चे ग्वेरा बोलविया पहुचे और क्रांति उकसाने की कोशिश की लेकिन पकडे गये और उन्हें गोली मार दी गयी.

che guevara cuba

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