कौन हैं नजिमा बीबी?

एक महिला जो पिछले 15 सालो से घरेलु हिंसा के खिलाफ अल्पसंख्यक महिलाओं के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है ! 2017 में चनाव लड़ कर वो मणिपुर से चुनाव लड़ने वाली पहली मुस्लिम महिला बन जाएगी !

कौन हैं नजिमा बीबी?

एक महिला जो पिछले 15 सालो से घरेलु हिंसा के खिलाफ अल्पसंख्यक महिलाओं के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है ! 2017 में चनाव लड़ कर वो मणिपुर से चुनाव लड़ने वाली पहली मुस्लिम महिला बन जाएगी !

मणिपुर साल 1949 में भारत का हिस्सा बना पर इससे एक राज्य का दर्ज साल 1972 में मिला ! यहाँ के करीब आधी आबादी नागा आदिवासियों की है ! और बाकि की आबादी भी समय के साथ चलना नहीं सीखा है ! मणिपुर जहा जातीय संघर्ष आम है ! ऐसे में यहाँ संघर्ष ,खून-खराब , अत्याचार होना आम बात है ! ऐसे माहौल में जहा शिक्षा का आभाव हो वह महिलाओ की स्थिति और भयानक हो जाती है !  मणिपुर की कुल जनसँख्या 2,388,634 जिसमे पुरुष 1,207,338 और महिलाये 1,181,296 है ! राज्य की ज्यादातर आबादी गावो में रहती है ! पर अब कुछ महिलाओ ने समाज बदलने का बीड़ा उठाया है ऐसी ही एक महिला हैं  नजिमा बीबी जो न सिर्फ विधान सभा का चुनाव लड़ रही है बल्कि वो ऐसा करने वाली पहली मुस्लिम महिला भी हैं !

कौन हैं नजिमा बीबी?

नजिमा बीबी मणिपुर की पहली मुस्लिम महिला उम्मीदवार हैं. वो उसी पार्टी से चनाव लड़ेगी जिसकी स्थापना इरोम शर्मिला ने साल 2016  में की है !चार मार्च को हो रहे राज्य के पहले चरण के चुनाव होना है ! इसमें नजिमा, इरोम शर्मिला की पार्टी पीपुल्स रिसर्जेन्स एंड जस्टिस एलाइन्स  पार्टी (प्रजा) से चुनाव लड़ने जा रही हैं. नजिमा प्रजा पार्टी की सह-संस्थापक भी हैं. उसका मनना है गरीबों और शोषितों की आवाज उठाने के लिए रणनीति एक अच्छा माध्यम है !  
                                  वह अपने क्षेत्र के नागरिको के पास जा जा कर अपना चनाव प्रचार कर रहा है इसके अलावा उनका ज़्यादा ध्यान उन अल्पसंख्यक समुदायों पर हैं जिनके लिए वो लबे समय से काम कर रही हैं वो उनके बीच जाकर चुनाव प्रचार कर रही हैं. हलकी पहली मुस्लिम हो कर चुनाव लड़ना इतना आसान नहीं है ! उनके   चुनाव मैदान में उतरने के ऐलान से मणिपुर के तमाम मुस्लिम संगठन खुश नहीं हैं ! वो नहीं कहते के नजिमा चुनाव लड़े इसलिए वो तमाम तरह के हथकंडे अपना रहे हैं.  इन संगठनों ने नजिमा को धमकी भी दी है . इस धमकी का विरोध करते हुए नजिमा ने उन मुस्लिम संगठनों से सवाल किया कि उनकी क्या गलती है और वे क्यों चुनाव नहीं लड़ें? नजिमा उनसे पूछ रही है आखिर वो चुनाव क्यों न लड़े वो महिला हैं इसलिए ?

शुरआती सफर !

नजिमा बीबी के यहाँ तक पहुचने की बात की जाये तो ये समझना ज़्यादा मुश्किल नहीं की मणिपुर में महिलाओ के हालात कितने खराब है ! महिला सशक्तिकरण के नाम का जो डंका बजाय जाता उसमे शायद कोई आवाज़ ही नहीं है ! नजिमा को बचपन से ही मुश्किल परिथितियों का सामना करना पड़ा है. वह जब छठी कक्षा में थीं, तो क्लास में अकेली लड़की थी. लड़कियों के साथ होने वाले परेशानियों को देखते हुए उनके घर वालों ने छोटी उम्र में ही नजिमा की शादी कर दी. हालांकि यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली और एक साल बाद ही नजिमा का अपने पति तलाक हो गया . तलाक के बाद वह अपने घर लौटीं और मोहल्ले की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर बचत कोष शुरू किया. इस बचत कोष में महिलाएं हर रोज एक मुट्‌ठी चावल इकट्‌ठा करतीं और एक महीने के बाद चावल को बेचकर उसी पैसे का इस्तेमाल पशुपालन में करती थीं. नजिमा ने स्थानीय महिलाओं के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप भी शुरू किया था. जब ये महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हुईं, तो इनमें घरेलू हिंसा से लड़ने के लिए भी बल मिला.

कौन है समर्थन में ?

पार्टी पीपुल्स रिसर्जेन्स एंड जस्टिस एलाइन्स  पार्टी (प्रजा) पार्टी की संयोजक इरोम शर्मिला नजिमा के साथ मजबूती से खड़ी हैं. उन्होंने कहा भी है कि हमारी पार्टी महिलाओं को ज्यादा सशक्त बनाने पर बल दे रही है.इरोम शर्मिला की इस पार्टी का लक्ष भी ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओ को मुख्य धरा में लेन का है! यही कारण है कि प्रजा पार्टी की 40 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाएं हैं और कार्यकारी सदस्यों में भी अधिकतर महिलाएं ही हैं. हलाकि प्रजा ने सिर्फ 10 सीट पर उम्मीदवार उतरने का कार्य किया है. इन सामाजिक चुनौतियों के बीच शर्मिला और नजिमा के सामने एक बड़ी समस्या चुनावी फंड की भी है. जहा आज कल ज़्यादा उम्मीदवार लाखो करोड़ो खर्च कर रहे हैं वही शर्मिला की पार्टी के पास इतना फंड नहीं जमा हो पाया है !शर्मिला ने मीडिया के सामने कहा भी कि नई पार्टी होने के कारण उनके सामने फंड का संकट है. प्रजा पार्टी चुनावी चंदे के द्वारा अब तक साढ़े लगभग चार लाख रुपए ही इकट्‌ठा कर पाई है. इसमें से भी ज्यादातर चंदे ऑनलाइन माध्यमों से मिले हैं. फंड की कमी को भरने के लिए उन्होंने ने एक उपाय निकल है ! अब वो चुनाव प्रचार के लिए शर्मिला और नजिमा इंफाल से 35 किमी दूर तक भी साइकल चलाकर ही जाती हैं. उनके साथ पार्टी के अन्य कार्यकर्ता भी साइकल से ही होते हैं.

najima bibi manipur

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