कभी मकोका तो कभी हरकोका आखिर ये है क्या ?

मुम्बई में बढ़ते जघन्ह और संगठित अपराधों से निपटने ले लिए महाराष्ट्र सरकार ने इसे बनाया बाद में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागु कर दिए अब हरियाणा भी यही करने जा रहा है

कभी मकोका तो कभी हरकोका आखिर ये है क्या ?

मुम्बई में बढ़ते जघन्ह और संगठित अपराधों से निपटने ले लिए महाराष्ट्र सरकार ने इसे बनाया बाद में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागु कर दिए अब हरियाणा भी यही करने जा रहा है

आज़ादी के कुछ ही सालो बाद भारत अलग अलग प्रकार की कई समस्सयाओ से घिर रहा था ! इनमे से एक समस्या थी बम्बई में बढ़ता हुआ क्राइम ! ६० के दशक तक मुम्बई में माफिया अपना पैर जमा चुके थे !  हत्या , फिरौती , स्मगलिंग ये सब अपराध आम होते जा रहे थे ! ७० के दशक में क्राइम का लेवल और भी बढ़ता चला गया ! ये दौर था माफिया हाजी मस्तान का ! Haji Mastan पूरा नाम Mastan Haider मिर्ज़ा जो की Haji Mastan, Bawa or Sultan Mirza के नाम से भी जाना जाता था इसका जन्म  Panaikulam गावो में हुआ जोकि  Cuddalore, Tamil nadu में स्थित है ! उसका धंधा सोना ,चांदी और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की स्मगलिंग करना था ! इस काम से इसने बहुत पैसा बनाया ! दूसरे बड़े माफियो में Karim Lala का नाम आता है ! इसका काम भी ज़ेवरों की स्मगलिंग का था ! समय के साथ माफियाओ के नाम बदलते गए कभी ये Haji Mastan हुए तो कभी Karim Lala कभी ये  Varadarajan Mudaliar तो कभी संतोष सेठी माफिया बदलते गए पर जो नहीं बदला वो थी मुम्बई की समस्या ! ये underworld की समस्या ९० के दश्तक में भी बानी रही ! इन सब समस्या से लड़ने के लिए महाराष्ठ सरकार ने एक कानून बनाया जिसको नाम दिया गया मकोका !

क्या है मकोका ?

अंडरवर्ल्ड के बढ़ते क्राइम से लड़ने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 1999 में एक कानून बनाया जो पहले बने से ज़्यादा सख्त ! इस कानून को मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) नाम दिया गया। इसका मुख्य मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध को खत्म करना था। महाराष्ट्र की तर्ज़ पर साल 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया। फिलहाल महाराष्ट्र और दिल्ली में यह कानून लागू है।

कैसे लगता है?

किसी के खिलाफ मकोका लगाने से पहले पुलिस को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से मंजूरी लेनी होती है। इसमें किसी आरोपी के खिलाफ तभी मुकदमा दर्ज होगा, जब 10 साल के दौरान वह कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो। संबंधित संगठित अपराध में कम से कम दो लोग शामिल होने चाहिए। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट दाखिल की गई हो। यदि पुलिस 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।

सख्त है मकोका

मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है, जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन है। मकोका के तहत आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन होती है। इस कानून के तहत न्यूनतम पांच साल जेल और अधिकतम सजा फांसी है।

क्या है हरकोका ?

हरियाणा सरकार ने कुख्यात अपराधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से महाराष्ट्र और दिल्ली में में लागु मकोका की तर्ज पर हरकोका लागू करने का फैसला किया है। इस दिशा में विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य संगठित अपराध जिसकी वजह से मुबई जैसे शहरो में अंडरवर्ड पनपा पर अंकुश लगाना है। हरियाणा भी बहुत लंबे समय से संगठित अपराध से ग्रसित है इसलिए हरयाणा सरकार अब इस समस्या से निजात पाना चाहती है । प्रदेश के कई हिस्सों में जमीनी विवाद के चलते अपराधिक घटनाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हरियाणा में ऐसे बहुत से ज़िले हैं जाना वंश वाद के तर्ज़ पे अपराध चल रहा है एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी अपराध का रास्ता अपना लेती है । जिसके चलते हरकोका कानून लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए गृह विभाग के अधिकारियों ने अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पर इस ने कानून को लागु करने से पहले महाराष्ट्र और दिल्ली में लागु इस कानून का रेस्पांस का रिव्यु किया जायेगा !

low makoka pota tada

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