क्या है यूनिफोर्म सिविल कोड / समान नागरिक संहिता ? | Gyan Ki Dukan

जिस देश में सैकड़ो जाती ,धर्म , संस्कृति हैं वहां सब के लिए एक सिविल कोड कानून कितना सही कितना गलत

क्या है यूनिफोर्म सिविल कोड / समान नागरिक संहिता ? | Gyan Ki Dukan

जिस देश में सैकड़ो जाती ,धर्म , संस्कृति हैं वहां सब के लिए एक सिविल कोड कानून कितना सही कितना गलत

Census 2011 के आंकड़े बताते हैं भारत 30.2% लड़कियों (10.3 करोड़) की शादी १८ साल से पहले हो जाती है ! लगभग 12 million Indian children १० साल से भी पहले विवाह के बंधन में बंध जाते हैं जिसमे 84 % हिन्दू हैं तो 11  % मुस्लमान हैं ! Annual Health Survey (2012-13)  की रिपोर्ट कहती है 51.2% महिलाये जिनकी उम्र 20 - 25 वर्ष है , इनका विवाह १८ साल की उम्र से पहले हुआ था ! ऐसे में देश में Uniform Civil code समान नागरिक संहिता पर बात होना ज़ाहिर है  ! ये मामला उस समय तूल पकड़ लेता जब कुछ धर्म का धंधा करने वाले लोग अपने मतलब के लिए इस गंभीर मसले पर उल्टा सीधा बयान देने लागते हैं ! 

क्या है यूनिफोर्म सिविल कोड / समान नागरिक संहिता ?

समान नागरिक संहिता(यूनिफोर्म सिविल कोड) एक धर्मनिरपेक्ष कानून या घर्म से हटकर एक ऐसे कानून है सभी धर्म के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है। जिस पर हिंदुस्तान में अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग सिविल कानून हैं और सब में अपने अपने नियम हैं इनसब को मिला कर या इन सब को हटा कर एक ऐसा कानून जिसके नियम सरे धर्मो पर लागु हो ऐसे कानून को   समान नागरिक संहिता कानून कहते हैं ! ये कानून किसी भी धर्म या जाती के अपने कानून से ऊपर होता हैं ! इसमें कानून के अंदर आता है प्रॉपर्टी का बटवारा और उसका अधिकार , शादी ,तलाक और गोद लेने संबधी नियम ! 

क्या है इतिहास ?

भारत में यह विवाद ब्रिटिशकाल से ही चला आ रहा है। अंग्रेज मुस्लिम समुदाय के निजी कानूनों में बदलाव कर उससे दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते थे। हालाँकि विभिन्न महिला आंदोलनों के कारण मुसलमानों के निजी कानूनों में थोड़ा बदलाव हुआ। आज़ादी के बाद भी ये मुद्दा बना रहा ! हलाकि Hindu Civil कोड बनाने की कोशिश आज़ादी से पहले भी की जा रही थी पर ऐसे नहीं हो पाया ! 1955 में हिंदू मैरिज एक्ट बनाया गया जिसके तहत तलाक को कानूनी दर्जा मिला . इसमें अलग-अलग जातियों के स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से विवाह का अधिकार दिया गया और एक से ज्यादा शादी को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया. ये मुद्दा 1978 में बार फिर सामने आया जब शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया गया ! साल १९८५ में भी एक ऐसे ही मामले में समान नागरिक संहिता पे फिर से बहस शुरू हो गई ! हालांकि विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के विरोध के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

हिन्दू सिविल कोड की मुख्य बाते ! 

१: तलाक को कानूनी दर्जा 
२: अलग-अलग जातियों के स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से विवाह का अधिकार 
३: उत्तराधिकार अधिनियम
४: हिंदू दत्तक ग्रहण और पोषण अधिनियम 
५: हिंदू अवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम
६: महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिया गया
यही कानून हिंदुओं के अलावा सिखों, बौद्ध और जैन धर्म पर लागू होता है.

मुस्लिम सिविल कोड ! 
मुस्लिम सिविल कोड मुस्लिमो के शरिया कानून पे आधरित होता है ! 

civil code

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