गरीबी अमीरी से कितनी दूर है ? | Gyan Ki Dukan

ब्रिटिश रेसेअर्चेर Oxfam का कहना है extreme global poverty की मिटने के लिए $60 बिलियन सालाना धन चाहिए जो विश्व के 100 बिलेनियर के धन से भी काम है !

गरीबी अमीरी से कितनी दूर है ? | Gyan Ki Dukan

ब्रिटिश रेसेअर्चेर Oxfam का कहना है extreme global poverty की मिटने के लिए $60 बिलियन सालाना धन चाहिए जो विश्व के 100 बिलेनियर के धन से भी काम है !

गरीबी अमीरी से कितनी दूर है ?

ब्रिटिश charitable ओर्गानिज़शन्स ऑक्सफेम की एक रिपोर्ट कहती है दुनिया के ८५ आमिरो की दौलत ३ करोड़ ५० लाख गरीबो के दौलत के बराबर है ! Credit Suisse, (financial सर्विसेज holding कंपनी) का कहने है भारत के कुल धन का ५३ % धन सिर्फ यहाँ के १ % आमिरो के पास है जबकि सन २००० में कुल धन का ३६.६ %  ही यहां के १ % आमिरो के पास था ! वहीँ अमेरिका के कुल धन का ५३ % सिर्फ १ % आमिरो के पास है ! जबकि ये आंकड़े रूस में और भी भयानक हैं ! रूस में कुल धन का ७० % हिस्सा १ % आमिरो के पास है ! ४०० अमेरिकी रईसों के पास आधे अमेरिकन के धन से ज़्यादा धन है ये लगभग $2 ट्रिलियन है जोकि करीब करीब रूस के जीडीपी के बराबर है ! ये सरे आंकड़े अमीरी और गरीबी के बिच बढ़ती हुई खाई को दर्शाते हैं ! ये खाई दिन बा दिन बढ़ती ही जा रही है ! आइये एक नज़र डालते हैं अब गरीबी के आकड़ो पर , दुनिया की करीब आधी आबादी 3 billion पीपल रोज़ाना लगभग $2.50 ही कमाती है ! जबकि करीब 1.3 बिलियन लोग बहुत ही ज़्यादा गरीबी में अपना जीवन बिता रहा है ये लगभग १.२५ $ से भी काम में अपना गुज़र बसर करते हैं ! यूनिसेफ का कहना है की रोज़ाना करीब २२००० बच्चे सिर्फ गरीबी की वगह मर जाते हैं ! दुनिया के करीब 750 मिलियन लोगो के पास पीना का साफ़ पानी उपलप्ध नहीं है ! ग़रीबी की वजह से सही इलाज न मिल पाने की वजह से diarrhea and निमोनिया जैसी बीमारिया हर साल तक़रीबन २० लाख बच्चो की जान ले लेती हैं ! दुनिया के एक चौथाई लोगो के पास अभी भी बिजली उपलप्ध नहीं है ! 80% of the world population lives on less than $10 a day.

==: कुछ रोचक आंकड़े :==

> ब्रिटिश रेसेअर्चेर Oxfam का कहना है extreme global पावर्टी की मिटने के लिए $६० बिलियन सालाना धन चाहिए जो विश्व के १०० बिलेनियर के धन से भी काम है !

> भारत सरकार के २०१२ के आकड़ो के अनुसार २७ करोड़ ६० लाख गरीबी रेखा से निचे जीवन बिता रहे हैं जबकी देश के २९६ रईसों के पास $478 बिलियन की सम्पति है जो जोकि सैयुक्त अरब अमीरात के कुल जीडीपी से अधिक है !

> भारत में तक़रीबन हर साल 25 लाख से ज़्यादा लोग भूख से मर जाते हैं ! दूसरी तरफ साल २००४ में Sahara super चीफ सुब्रत रॉय ने अपने बेटे की शादी में लगभग 5.52 बिलियन िनर खर्च किये !

> विश्व के 10 richest बिल्लिओनेरेस की कुछ आय दुनिया के कई देशो के जीडीपी से ज़्यादा है !

> Oxfam के नई रिपोर्ट ने ये खुलासा किया है की दुनिए के ८ रईस की सम्पति विश्व के 3.6 billion गरीब जनता की कुल सम्पति के बराबर है !

क्यों है इतनी दुरी

अमीर और ग़रीब के बीच दुरी जिसे Economic इनकुअलिटी भी कहा जाता है ! Economic इनकुअलिटी जिसका अर्थ व्यक्तिगत या समूहों के बीच असमानता ! Economic इनकुअलिटी शब्द समानता शब्द से सम्बंधित है जिसका अर्थ होता है सभी व्यक्ति या समूहों को अच्छा जीवन जीने का सामान अवसर मिले !  अमीर और ग़रीब के बीच दुरी के अनेको कारन है !

> वेतन असमानता ;
> skilled workers and low-skilled or no-skills वर्कर्स के बीच आय में अंतर;
> सम्पति का कुछ खास लोगो और संसथान  के हाथो में होना
> Labor markets;
> वैश्वीकरण ;
> तकनीकी बदलाव ;
> नीति बदलाव ;
> कर संबंधी बदलाव ;
> शिक्षा;
> जातिवाद ;
> लिंगभेद ;

> वेतन असमानता : किसी अर्थवयवस्था का बुनयादी सिद्धान्त आपूर्ति और मांग पे टिका होता है ! अगर किसी काम को करने वाले वर्कर काम है और उसका कार्य की डिमांड ज़्यादा है और वर्कर इस कार्य कोर करने में ज़्यादा समय लगते है तो इस प्रिकिर्या में वर्कर को अच्छा वेतन मिलेंगे ! लेकिन किसी संसथान में वर्कर ज़्यादा है और डिमांड काम है तो इस प्रिकिर्या वर्कर को काम वेतन मिलेगा !

> वैश्वीकरण : हर देश की अर्थवयवस्था आज वैश्वीकरण से आछुति नहीं है ! वैश्वीकरण  की वगह से आज अर्थवयवस्था को एक नया रास्ता मिल रहा है ! इसमें कुछ खूबियां भी हैं और कुछ खामिया भी ! आज एक देश की अर्थवयवस्था में आये बदलाव का आसार दूसरे देश की अर्थवयवस्था पर सीधा पड़ता है !

> तकनीकी बदलाव : आज हम तकनीकी युग में जी रहे हैं ऐसे में तकनीक का हमारे अर्थवयवस्था पे पड़ना ज़ाहिर है ! ऐसे में तकनीकी बदलाव अर्थवयवस्था  का  महत्वपूर्ण भाग बनते जा रहे हैं ! दिन प्रतिदिन होने वाले नए नए तकनीकी बदलाव से कंपनियो के प्रोडक्ट उत्पादन छमता बाद रही रही है और समय भी बच रहा है !

> नीति बदलाव ,कर संबंधी बदलाव ,लिंगभेद ,जातिवाद आती का भी अर्थवयवस्था पर गहरा आसार पड़ता है ! जिससे Economic इनकुअलिटी पैदा होती है !

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