एक राष्ट्रपति भुत से परेशान तो एक मुख्यमंत्री अपशगुन से परेशान

ब्राजील के राष्ट्रपति ने भूतो और आत्माओ से परेशान हो कर उप राष्ट्पति के घर में शरण ली है तो दूसरी और 1940 में बानी एक इमारत (सैफाबाद पैलेस) बनते ही अपशगुन हो गई क्यू की वहां से दो मॉनीटर लिज़र्ड गुज़र गए थे !

एक राष्ट्रपति भुत से परेशान तो एक मुख्यमंत्री अपशगुन से परेशान

ब्राजील के राष्ट्रपति ने भूतो और आत्माओ से परेशान हो कर उप राष्ट्पति के घर में शरण ली है तो दूसरी और 1940 में बानी एक इमारत (सैफाबाद पैलेस) बनते ही अपशगुन हो गई क्यू की वहां से दो मॉनीटर लिज़र्ड गुज़र गए थे !

भूतों प्रेतो की कहानी सदियो पुराणी है ! हज़ारो सालो से ऐसी कहानिया पूरी दुनिया में सुनने को मिल जाती हैं ! पहली शताब्दी A.D. में रोमन author and statesman Pliny the Younger ने एक पत्र में एक भुतहा कहानी लिखी ! ये कहानी बहुत ही लोक पिरये हुयी ! The Greek writer Lucian and Pliny’s fellow Roman Plautus ने भी भूतो की कहनिया लिखी ! पर क्या सच में कही कोई भुत दिखा भी है या नहीं ! साल 2014 में भारत के सूरत शहर के प्रसिद्ध पार्ले प्वाइंट अपार्टमेंट के पास एक इमारत स्थित है जो कि पिछले कई सालों से बन्द और वीरान थी। सूरत के लोग उसे भूतहा इमारत कहते है। इसी इमारत के पास से आधी रात को चार दोस्त गुजर रहे थे। अचानक उन्हें इमारत से कुछ गिरने कि आवज़ सुनाई दि , उन्होने मुङ कर देख तो वह एक लेडीज़ सेंडिल पड़ी थी। उत्सुकतावश उन्होने ऊपर नजर कि तो उन सब के होश उड़ गये।  उन्हें उस भूतिहा इमारत कि चौथी मन्ज़िल कि बालकनी पर बड़े हि ख़तरनाक़ तऱीके से बैठी हुईं एक अस्त व्यस्त सि लडकी नज़र आई। जब कुछ लोग हिम्मत कर के देखने गए तो वह एक मानसिक रूप से बीमार लड़की मिली ! जिसके भुत होने के कोई साबुत नहीं मिले ! पर ऐसे घटनाये हमें सुनने को मिलती रहती हैं ! पर जब इनका असर देशो के राष्ट्रपतियों और मुख्यमंत्रियों पर होने लगे तो क्या होगा ?

ताज़ा खबर आयी हैं ब्राजील के रियो डी जिनेरियो से : ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमेर की मने तो उन्हें बुरी आत्मए तंग कर रही हैं जिस वजह से उन्होंने अपना घर बदलने का फैसला लिया है !  राजधानी ब्रासीलिया स्थित अपने आलीशान आधिकारिक आवास को छोड़ने के लिए वह मजबूर हैं. यह जानकारी ब्राजील में साप्ताहिक समाचार पत्र ने दी है.
                                       ब्राजील की जनता को उस समय हैरानी हुयी जब टेमर ने ब्राजील की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों को इस सप्ताह यह कहकर हैरान कर दिया था कि उन्होंने एल्वोरेडा पैलेस छोड़ दिया है और वह अपनी पत्नी और सात साल के बेटे के साथ उपराष्ट्रपति आवास में रहने चले गए हैं, जो कि एल्वोरेडा पैलेस से छोटा है. एल्वोरेडा का अर्थ है सूर्योदय। इसका डिजाइन ब्राजील के वास्तुकार ऑस्कर नाइमेयर ने किया था. इतना बड़ा और आलीशान भवन कई लोगों का सपना होगा. इसमें एक बड़ा स्वीमिंग पूल, फुटबॉल का मैदान, प्रार्थनालय, चिकित्सा केंद्र और बड़ा सा बगीचा है. लेकिन 76 वर्षीय टेमर और उनकी 33 वर्षीय पत्नी मार्केला को कांच के शानदार काम वाली यह इमारत भूतिया लगती है.
               वेजा ने कल टेमर के हवाले से कहा, ‘मुझे यहां कुछ अजीब लगता है. मैं पहली रात से ही यहां सो नहीं पाया हूं. यहां अच्छी उर्जा नहीं है.’ ‘मार्केला को भी ऐसा ही महसूस हुआ. सिर्फ मिशेलजिन्हो (उनका बेटा) को यह पसंद आया है. वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक भागता रहता था.’ उन्होंने कहा, ‘हम तो यह भी सोचने लग गए थे कि कहीं यहां भूत तो नहीं हैं?’ ग्लोबो अखबार की एक खबर के अनुसार, मार्केला टेमर ने बुरी आत्माओं को भगाने के लिए एक पादरी को भी यहां बुलाया था लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद टेमर परिवार एक छोटे लेकिन शानदार जबुरू पैलेस में चले गए.

एक दूसरी घटना है भारत के एक राज्य तेलंगाना की :

तेलंगाना भारत का एक राज्य है जो आंध्रप्रदेश से अलग होकर बना है ! अब एक रोचक बात सामने आई है तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव एक सरकारी इमारत को इसलिए तोड़ने जा रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि राज्य के लिए ये इमारत अशुभ है. इस ईमारत को तोड़ कर एक नै ईमारत बानी जाएगी ! नै ईमारत को बनाने में तक़रीबन तीन अरब 47 करोड़ रुपए खर्च होगें ! 
                  साल 1888 में बना सैफाबाद पैलेस, तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री को अभिशाप लग रहा है.सैफाबाद पैलेस का निर्माण हैदराबाद के छठे निज़ाम महबूब अली पाशा ने कराया था. जब ये ईमारत बन कर तैयार हुई तब निज़ाम ने इसके तुरंत ही इस पर ताला लगाने का हुक्म दिया और तभी से इस इमारत पर अपशकुन का ठप्पा भी लग गया.

इसके पीछे की कहानी दिलचस्प है.

कहा जाता है ,दो लोग जो नहीं चाहते थे कि निज़ाम इस महल में रहें, उन्होंने उनके वहां से गुज़रने के दौरान एक मॉनीटर लिज़र्ड वहां से गुज़ार दी, जिसे अपशकुन माना जाता था. इसके बाद निज़ाम ने इस पैलेस को बंद करने का फरमान जारी कर दिया था.

हालांकि इस मामले में तेलंगाना मुख्यमंत्री को कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है . एक विपक्षी विधायक ने इमारत इस फैसले के ख़िलाफ़ हैदराबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को अस्थायी रूप से रोक दिया है.

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