सिनेमा हॉल खुलते बंद होते रहते है पर रीगल के बंद होने पर लोग इतने भवूक क्यों हो गए ! | Gyan Ki Dukan

रीगल 85 साल बाद सिनेप्रेमियों से हमेशा के लिए विदाई ले रहा है ऐसे में लोगो का भावुक होना शायद सव्भाविक है क्योंकि सब की अपनी कुछ खट्टी मीठी यादे यहाँ से जुडी हैं

सिनेमा हॉल खुलते बंद होते रहते है पर रीगल के बंद होने पर लोग इतने भवूक क्यों हो गए ! | Gyan Ki Dukan

रीगल 85 साल बाद सिनेप्रेमियों से हमेशा के लिए विदाई ले रहा है ऐसे में लोगो का भावुक होना शायद सव्भाविक है क्योंकि सब की अपनी कुछ खट्टी मीठी यादे यहाँ से जुडी हैं

सिनेमा हॉल खुलते बंद होते रहते है पर रीगल के बंद होने पर लोग इतने भवूक क्यों हो गए !

30 मार्च 2017 को रीगल का आखरी शो दिखया जा रहा है आज के शो में  'मेरा नाम जोकर' और 'संगम' फ़िल्में दिखाई जाएगी ! इस सिनेमा हॉल के बंद होने पर लोग बहुत भावुक दिखे ! निजी न्यूज़ पेपर हिंदुस्तान टाइम्स ने कुछ लोगो की राय छपी है वो इस प्रकार है 

"75 साल के गुडगाँव के रहने वाले PK Gulati का कहना है हम यहाँ ५० साल पहले थे पर कुछ समय से यहाँ नहीं आ रहे थे पर जब हमने सुना रीगल बंद होने वाला है तो हम यहाँ आये हैं और अपने नाती पोतो के साथ आये हैं !"

"Gulsahan आनंद जो अब 67 साल के हैं इंदिरापुरम में रहते हैं उनका कहना है मैं अपने जवानी अम्बाला से यहाँ आया था ! मैं अपने परिचित के घर पे रुका था जो की तिलक नगर में था हम यहाँ DTC की बस पकड़ कर आये थे ! उस समय 6 नंबर की बस यहाँ आने के लिए लेनी पड़ती थी !  " 

"पहाड़गंज के रहने वाले सौरव ने भी इस आखिरी शो का टिकेट लिए है उनका कहना है मेरे पिता जी का इस सिनेमा हॉल से गहरा रिश्ता रहा है उन्होंने मुझे यहाँ भेज है इस आखरी शो के लिए   "

 

रीगल है क्या ?

रीगल एक सनीमा हॉल है जिसकी शुरआत साल 1932 में हुई थी ! ये अपने समय का सबसे बड़ा और भव्य थिएटर रहा है ! इसमें बूलीवूड और हॉलीवुड दोनों की मूवीज के प्रीमियर सबसे ज़्यादा हुए हैं ! इस रीगल लार्ड मौन्टबैटन , जवाहरलाल नेहरू और इंद्रा गाँधी जैसी हस्तिया भी आ चुकी हैं ! इसलिए इसकी अहमियत बहुत बढ़ जाती हैं ! ये सिनेमा न सिर्फ दिल्ली के लोगो का पसंदीदा थिएटर था बल्कि यहाँ बॉलीवुड के सितारों की भी हाज़री लगती थी ! बॉम्बे से आने वाले ज़्यादातर हस्तिया यहाँ ज़रूर आती थी ! राज कपूर परिवार का इससे गहरा रिश्ता रहा है उनकी ज़्यादा तार फिल्मो का  प्रीमियर रीगल में ही हुआ करता था ! आर.के. बैनर तले बनी कई फिल्मो ने यहाँ अपना सिल्वर जुबली भी पूरा किया इस बैनर की लगभग सभी फिल्मे यहाँ दिखयी गई !

कितना बड़ा था रीगल ?

रीगल में 154 बालकनी सीट हैं ,285 रियर सीट्स ,  40 बॉक्सेस और 179 फ्रंट सीट्स हैं ,आखिर शो के लिए सारी सीटें फुल रही ! इससे पहले सीटें फूल हुई थी आमिर खान की फिल्म दंगल में और उसे पहले सलमान खान की फिल्म सुल्तान में ! सर सोभा सिंह के ज़मीं पर रीगल को बनाया गया था ! इस हॉल का डिज़ाइन  वॉल्टर साइक्स ने किया था ! इसकी अंदुरिनी बनवाट आधा गोलाकार गुंबद जैसी है जिससे मुग़ल कल की शैली का प्रभाव दीखता है ! यहाँ कुछ बेहतरीन नाटक भी हुए हैं जैसे 'द लंदन रीव्यू कंपनी' और 'द रशियन बैले ट्रुप' ! 

रीगल से जुडी कुछ यादें !

#भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को रीगल से खास लगाव था ! वो यहाँ अक्सर आया करते थे पर वो भीड़ से बचने के लिए फ़िल्म ख़त्म होने से कुछ मिनट पहले ही उठकर चले जाते थे.एक बार उनका पूरा कैबिनेट रीगल फ़िल्म देखने आया था.

#फिल्म 'सत्यम शिवम् सुंदरम' के प्रीमियर से पहले हवन कराया गया था. इस फिल्म को लोगो ने खूब आहें भर भर के देखा था ! 

#कुछ लोगो के लिए यहाँ अपने पसंदीदा सितारों से मिलने का मौका होता था 

# कुछ लोग रीगल को इसलिए भी याद करते हैं क्यों की रीगल गंभीर विषय पर बानी फिल्मो के लिए कई बार आगे आया था  

क्यों बंद हो रहा है रीगल ?

1932 अपने निर्मल का बाद रीगल कई दशको तक दिल्ली की शान बना रहा ! देश विदेश से दिल्ली आना वाले लोगो में रीगल का अपना एक क्रेज था ! जो भी दिल्ली के कनॉट प्लेस आता वो रीगल के बारे में ज़रूर सुनता पर 80 और 90 का दशक आते आते रीगल की साख गिरने लगी थी ! अब नए नए थिअटर आ रहे थे सिंगल स्क्रीन की जगह अब मल्टीप्लक्स ने लेना शुरू कर दिया था ऐसे दौर में भी रीगल चलता रहा पर इसे बंद किया जा रहा है रीगल के मालिकों का कहना है उनकी योजना हाल को सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स बनाने की है ! मल्टीप्लेक्स बनाने को लेकर एनडीएमसी समेत अन्य विभागों को आवेदन किया गया है. जब इसकी मंजूरी मिल जाएगी तो इस इतिहासिक होल को तोड़ कर मल्टीप्लेक्स में तब्दील किया जाएगा. इस काम में १-२ साल लगने की सम्भावना है ! 

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