सकल राष्ट्रीय आय GNI (Gross National Income) क्या है ? |

इसे जीडीपी में जोड़ा जाता है ताकि जीडीपी का वास्तविक माप मिल सके ! इसमें उस देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों को भी जोड़ा जाता है, भले ही उस वस्तु का उत्पादन या वह सेवा देश के भीतर दी जा रही हो या देश के बाहर।

सकल राष्ट्रीय आय GNI (Gross National Income) क्या है ? |

इसे जीडीपी में जोड़ा जाता है ताकि जीडीपी का वास्तविक माप मिल सके ! इसमें उस देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों को भी जोड़ा जाता है, भले ही उस वस्तु का उत्पादन या वह सेवा देश के भीतर दी जा रही हो या देश के बाहर।

वैश्वीकरण या ग्लोबलिज़शन की वजह से लोगों की आय और आय का स्रोत अब किसी एक देश की सीमा से बंधी नहीं रह गई है। लोग अब दूर देश जाकर कारोबार कर रहे हैं नौकरी कर रहे हैं अपनी कंपनिया चला रहे हैं ! अब तो लोग कई कई देशो में अपना कारोबार कर रहे हैं ! इसलिए अब लोगो की आये को एक देश अंदर बांध नहीं जा सकता ! इससे जीडीपी के मापन का सही आकलन नहीं लग पता इसलिए जीडीपी के सही माप के लिए सकल राष्ट्रीय उत्पाद यानी जीएनपी को भी जोड़ा जाता है। इसमें उस देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों को भी जोड़ा जाता है, भले ही इन का उत्पादन देश के बहार हो रहा हो या देश के भीतर !

सकल राष्ट्रीय आय  GNI (Gross National Income) क्या है ?

किसी देश के नागरिको द्वारा देश में या देश के बाहर एक वर्ष में किये गये अंतिम रूप से उत्पादित कुल वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) कहा जाता है। इसे जीडीपी में जोड़ा जाता है ताकि जीडीपी का वास्तविक माप मिल सके ! इसमें उस देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों को भी जोड़ा जाता है, भले ही उस वस्तु का उत्पादन या वह सेवा देश के भीतर दी जा रही हो या देश के बाहर। जीडीपी की गणना करते समय महंगाई दर को भी देखा जाता है।

 देश की अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए कई मापदंड भी बनाए गए हैं। महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए जीडीपी डिफ्लेटर भी जोड़ा जाता है। जीडीपी डिफ्लेटर एक ऐसा मानक है जिसे वस्तुओं या सेवाओ की कीमतों को संतुलित करने के लिए उपयोग किया जाता है ! यह ऐसा मानक होता है, जो सभी घरेलू उत्पादों और सेवाओं के मूल्य का स्तर तय करता है। इसका इस्तेमाल एक निश्चित समय में जीडीपी में वास्तविक बढ़ोतरी जोड़ने के लिए किया जाता है। इसमें किसी खास वर्ष को आधार वर्ष माना जाता है। आधार वर्ष में समय समय पर परिवर्तन करना पड़ता है ताकि हर तरह की आर्थिक गतिविधियों को जीडीपी में सम्मिलित किया जा सके !

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